Reverie

Just A Thought

I want to hop in the puddle,

I want to dance in the rain.

For this, you can call me a little insane,

But I want to whistle in the lane.

 

When blessings are being showered by elders,

I don't want myself to be left behind.

Cuddles and hugs from the dear ones,

And lot of pampering, I don't mind.

 

I hate to do what I don't feel like doing,

And love to love my loved ones.

I enjoy to irritate them a little,

But wish their love for me should be in tons.

 

My fantasies are childish,

But my dreams are mature.

I chirp around to live my life,

And work honestly to make myself secure.

 

But all my chirpiness and liveliness,

Sometimes I feel is just a show.

I'm fortunate to have nice people around me,

Even then, sometimes, why do I feel so low?

 

Optimism and determination is always there,

When I strive to achieve my ambition.

But work is just an aspect of my life,

Lot of pranks are also in my mission.

 

 

Every moment of my life I  want to cherish,

Enjoying life every moment is what I  believe.

Too many dreams are there in my eyes,

All my dreams one day I hope to achieve……

 

                                       -PreetyKaithwas

by Preety Kaithwas- Reverie 'Mai'
by Preety Kaithwas- Reverie 'Just a Thought'

मै

कभी लहरों सा शोर सुनाती हूँ

कभी गुमसुम सी चुप कर जाती हूँ ।

कभी बागों में, कभी कलियों पर

कभी डालों पर लहराती हूँ ।।

 

दिल की धड़कन को सुनने को

कभी हौले से रुक जाती हूँ ।

दस्तक न सुन कर कोई वहाँ

फिर आगे मैं बढ़ जाती हूँ ।।

 

ख्वाबों में गर आहट हो

फिर उनमें मैं बह जाती हूँ ।

ख्वाब ही था, न कोई हकीकत

फिर आँखों को समझाती हूँ ।।

 

अपनों से प्यार जताने को

जाने क्या-क्या खेल रचाती हूँ ।

बिन बात के ही इठलाती हूँ

बिन बात के ही इतराती हूँ ।।

 

कोई बात छिड़े तो फिर उसमें

कभी नदिया सी बह जाती हूँ ।

कोई बात नहीं फिर भी यूं ही

कभी कुछ कहने से घबराती हूँ ।।

 

कभी अपनों से ही मैं लड़ जाती हूँ

कभी गैरों से प्यार जताती हूँ ।

फूलों को ताव दिखाने को

कभी काँटों को सहलाती हूँ ।।

 

दूर गगन के ख्वाब सजा

कभी तितली सी मंडराती हूँ ।

पूरा ना हो ख्वाब तो फिर

कहीं झुरमुट में छुप जाती हूँ ।।

 

कोई बात नहीं फिर भी अँखियों से

कभी बादल सा बरसाती हूँ ।

कभी बात बड़ी फिर भी नयनों को

बिन असुयन के तरसाती हूँ ।।

 

लोगों को राह दिखाने को

कभी कोई शमा जलाती हूँ ।

वो शक्स तो पा जाता है मंजिल

उस शमा से मैं जल जाती हूँ ।।

 

दिल से जो बनते हैं रिश्ते

हर उस रिश्ते में मैं बस जाती हूँ ।

अपनों का प्यार मैं पाती हूँ

और उन पर जान लुटाती हूँ ।।

 

छोटी छोटी बातों में

जाने क्या खुशियाँ पाती हूँ ।

कभी यूं ही मैं शरमाती हूँ

कभी खुद पर ही बलखाती हूँ ।।

 

मीठे-मीठे ख्वाब सजा

शायद खुद को बहलाती हूँ ।

पर जीवन के कुछ प्रश्नों से

अब तो, मैं भी, कुछ कुछ घबराती हूँ।।

 

                               -प्रीती कैथवास